बिल्डर से 2 करोड़ रुपये की हफ्ता उगाही की कोशिश में दो RTI कार्यकर्ताओं के खिलाफ FIR दर्ज

 

मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच की एंटी-एक्सटॉर्शन सेल (AEC) ने एक रियल एस्टेट कंपनी से करीब 2 करोड़ रुपये की उगाही करने और धमकाने के आरोप में एक ‘RTI कार्यकर्ता’ और उसके सहयोगी के खिलाफ मामला दर्ज किया है। दोनों पर प्रभादेवी स्थित प्रमुख व्यावसायिक इमारत रैशनल हाउस के पुनर्विकास का काम रुकवाने की धमकी देकर पैसे मांगने का आरोप है। इस इमारत में एक बहुराष्ट्रीय बैंक और वित्तीय सेवा कंपनी गोल्डमैन सैक्स का रजिस्टर्ड ऑफिस भी है।

पुलिस अधिकारी ने बताया, “रैशनल आर्ट्स ऑफ प्रेस प्राइवेट लिमिटेड में काम करने वाले तिजारत खान की शिकायत के आधार पर राघवेंद्र कोलगी और संतोष गुप्ता के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। यह कंपनी फजलानी ग्रुप ऑफ कंपनीज की सहायक कंपनी है।” रैशनल आर्ट्स ऑफ प्रेस संपत्तियों की खरीद-बिक्री और लीजिंग के साथ-साथ निर्माण कारोबार से भी जुड़ी है।

FIR के मुताबिक, रियल एस्टेट कंपनी ने जनवरी 2006 में रैशनल हाउस खरीदा था और इमारत को गिराकर उसके पुनर्विकास के लिए BMC से अनुमति मांगी थी। 9 मार्च 2026 को BMC ने कंपनी को पत्र भेजकर बताया कि कालबादेवी निवासी राघवेंद्र कोलगी ने पुनर्विकास को लेकर शिकायत की है। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि संबंधित भूखंड इंडस्ट्रियल जोन में आता है, जबकि कंपनी ने कमर्शियल इस्तेमाल की अनुमति मांगी है। साथ ही, जोन बदलने के लिए जमा किए गए कुछ दस्तावेजों को भी अप्रासंगिक बताया गया था।

कंपनी ने शिकायत का जवाब दिया, लेकिन इसके बाद पुनर्विकास का काम अस्थायी रूप से रोक दिया गया और परेल स्थित एफ वार्ड के अतिरिक्त आयुक्त के समक्ष सुनवाई तय की गई।

एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, “इसी दौरान एक व्यक्ति साइट पर पहुंचा और कंपनी के प्रतिनिधि से कहा कि अगर वे दोबारा काम शुरू करना चाहते हैं तो अपने वरिष्ठ अधिकारियों से उसका मोबाइल नंबर लेकर उससे संपर्क करने को कहें।”

कंपनी के निदेशक आरिफ फजलानी से संपर्क करने के बाद शिकायतकर्ता ने साइट पर पहुंचे व्यक्ति से बात की और पता चला कि उसके द्वारा दिया गया मोबाइल नंबर राघवेंद्र कोलगी का था।

पुलिस के मुताबिक, इसके बाद कंपनी के प्रतिनिधियों ने राघवेंद्र कोलगी से मुलाकात की। उसने बताया कि वह निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ना चाहता है और उसे चुनाव के लिए पैसों की जरूरत है। आरोप है कि उसने शिकायत वापस लेने के बदले 2 करोड़ रुपये की मांग की। उसने यह भी भरोसा दिलाया कि इसके बाद वह परियोजना के खिलाफ कोई और शिकायत नहीं करेगा।

जब शिकायतकर्ता ने राघवेंद्र कोलगी से कहा कि कंपनी के सभी दस्तावेज वैध हैं और वह कोई पैसा नहीं देगा तो राघवेंद्र कोलगी ने कहा कि BMC में उसके अच्छे संपर्क हैं और वह पुनर्विकास का काम लगातार रुकवाता रहेगा। उस पर शिकायतकर्ता को जान से मारने और साइट पर स्थानीय गुंडों को भेजकर नुकसान पहुंचाने की धमकी देने का भी आरोप है।

शिकायतकर्ता ने जब कोलगी को बताया कि संतोष गुप्ता नाम के एक अन्य व्यक्ति ने भी BMC में हूबहू इसी तरह की शिकायत की है, तो राघवेंद्र कोलगी ने स्वीकार किया कि वह संतोष गुप्ता को जानता है।

पुलिस अधिकारी ने बताया, “राघवेंद्र कोलगी ने शिकायत वापस लेने के लिए बातचीत के बाद तय की गई 1 करोड़ रुपये की रकम देने के लिए शिकायतकर्ता को 3 अगस्त तक का समय दिया था। संतोष गुप्ता ने भी बातचीत के बाद अपनी मांग घटाकर 30 लाख रुपये कर दी।”

पुलिस अधिकारी ने बताया- “दोनों के खिलाफ दादर पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 308 (जबरन वसूली) और 351 (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज किया गया है।”

मामले की जांच क्राइम ब्रांच की एंटी-एक्सटॉर्शन सेल कर रही है।

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